उड़ान

बेवजह सा खुद से कुछ , जिक्र कर बैठा हुँ । तन्हां हुं और जिंदगी से , मोहब्बत कर बैठा…

फ़ना

कुछ बचा है क्या, जो खो जाने से डरता हूँ , खाली हाथ है मेरे ,अब लकीरे बदल जाने से…

चाँद

आज चाँद कुछ ,मुस्कुराता दिखाई दे रहा है ।। बदलो में चुप , कुछ शर्माता दिखाई दे रहा है ।।…

प्रतिकार ।।

चलो आज तुम्हें तूफ़ान दिखाता हूँ.. थाम के रखना हाथ मेरा.. आज लहरों का तुम्हें बहाव दिखाता हूँ… जो मुझको…