प्रतिकार ।।

चलो आज तुम्हें तूफ़ान दिखाता हूँ.. थाम के रखना हाथ मेरा.. आज लहरों का तुम्हें बहाव दिखाता हूँ… जो मुझको…

प्रतिकार ।।

चलो आज तुम्हें तूफ़ान दिखाता हूँ.. थाम के रखना हाथ मेरा.. आज लहरों का तुम्हें बहाव दिखाता हूँ… जो मुझको…

मेरी आज़ाद ग़ुलामी ।।

एक दायरा कुछ यूं सा बना दे।। मेरी सोच, मेरे ज़हन को बस यूं सिमटा दे ।। यह उड़ती है…

तनहाई…..

कुछ अजीब सा था, आज मेरे ख्यालों में कुछ तो खास था, वो अंधेरे मे उड़े सवालों में झिझक ,कुछ…

किस्सा- मेरा पर आपका ।

एक सफर में मैने खाना कुछ इस तरह खाया । एक प्लास्टिक की थाली में सब्जी,चावल,रायता,रोटी बड़ी अच्छी तरह सजा…

Kuch yuhi…….

एक छंद लिखूं या प्रसंग लिखूं फिर सोचा इस टूटे दिल पर क्यूँ ना कोई व्यंग्य लिखूं….. एक व्यथा लिखूं…