Kuch yuhi…….

एक छंद लिखूं या प्रसंग लिखूं फिर सोचा इस टूटे दिल पर क्यूँ ना कोई व्यंग्य लिखूं….. एक व्यथा लिखूं…

Dunia aaj ki 

चैन मिलता नही , चेन बिक जाती है । मेहनत मजदूर करता है , जेबें मालिको की भर जाती है…

दरिद्र की सोच

एक लाचारी , एक झुंझलाहट को जरूरतों में बंटते देखा है ।। आज सवालो को जवाबो की गहराही से कटते…

Holi 

Incident Holi ke din hum samne wale ke hath mein rang na dekh apna share krte hai n use khud…

ohhh

Hawawa to puch ohna di, Fiza ki aa Samundra to puch. ohna da , raah ki aa Te isq. mere…